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युग बदला, गीता नहीं

इस्तांबुल में प्रलयकारी बाढ़ | तूफ़ान में स्थिरता — गीता की 3 सीखें | युग बदला, गीता नहीं Ep 14

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14–15 अक्टूबर 2026 की रात — तुर्की के इस्तांबुल में मूसलाधार बारिश से भीषण बाढ़। गलियाँ नदियाँ बन गईं, गाड़ियाँ बह गईं, घरों में पानी घुसा। अधिकारियों के अनुसार यह अस्सी से ज़्यादा वर्षों की सबसे भारी बारिश थी — पर्यावरण मंत्री मुरात कुरुम ने कहा, तिरासी वर्षों में इतनी बारिश नहीं हुई, और इसे जलवायु संकट से जोड़ा। अगले महीने वही मंत्री अंताल्या में COP31 जलवायु सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। रिपोर्टों के अनुसार अब तक कम से कम 3 लोगों की जान गई है, 5 लोग लापता हैं, और 3,000 से ज़्यादा लोगों को बचाया या सुरक्षित जगह पहुँचाया गया है। आयाज़ागा इलाक़े में सबसे ज़्यादा तबाही हुई — ऊपर की ओर एक नाला टूटने से बाढ़ आई; कई इलाक़ों में बिजली और गैस काटनी पड़ी। और इसी तबाही के बीच एक मानवीय तस्वीर — एक महिला बाढ़ के पानी में बचाए गए बिल्ली के बच्चों का डिब्बा लेकर चलती नज़र आई। जब प्रकृति अपनी शक्ति दिखाए और सब कुछ नाज़ुक लगे, तो हृदय को क्या सँभाले? इस एपिसोड में SarthiAI गीता के तीन सूत्र खोलता है: 1. गीता 2.14 — आगमापायिनोऽनित्याः: सुख-दुःख, ठंडक-गर्मी मौसम जैसे आते-जाते हैं; धीर बनो 2. गीता 6.5 — उद्धरेदात्मनात्मानम्: संकट में पहले स्वयं को उठाओ, स्वयं को गिरने न दो 3. गीता 3.20 — लोकसंग्रह: पड़ोसी पड़ोसी की जान बचाएँ — यही दुनिया के कल्याण हेतु कर्म है परिस्थितियाँ बदलती हैं — गीता नहीं 🙏 🌐 https://bhaktiverse.com 🔔 YouTube: https://www.youtube.com/@MyBhaktiVerse 📸 Instagram: @bhaktiverse.bharat 👍 Facebook: https://www.facebook.com/anitesh.shaw 💬 WhatsApp: https://chat.whatsapp.com/HK8CX1Y4eKgEiLlLhnuhER

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