षष्ठी श्राद्ध 2026 | पितृ पक्ष का छठा दिन — नित्य भक्ति का बल | गीता 9.22 | Pitru Paksha
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पितृ पक्ष का छठा दिन — षष्ठी श्राद्ध! छह दिन से रोज़ वही दीया, वही तर्पण, वही स्मरण। परंपरा के अनुसार, षष्ठी तिथि का श्राद्ध उन पूर्वजों के लिए किया जाता है जो षष्ठी तिथि को दिवंगत हुए। और पितृ पक्ष का सबसे गहरा संदेश आज सामने आता है — श्राद्ध एक दिन का उत्सव नहीं है। जैसे दीये में हर शाम तेल डालना पड़ता है, वैसे ही स्मरण भी रोज़ का संकल्प है। भगवद्गीता (9.22) कहती है — "तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्" — जो नित्य, एकाग्र भाव से मेरी उपासना करते हैं, उनके योग-क्षेम की रक्षा मैं स्वयं करता हूं। नित्य शब्द पर ध्यान दीजिए — भक्ति में निरंतरता ही सबसे बड़ा बल है। छह दिन, एक ही दीया — श्रद्धा एक दिन का कर्म नहीं, जीवन का संकल्प है। 🙏 रोज़ ऐसी ही भक्ति भरी कहानियाँ पाने के लिए जुड़िए: 🌐 https://bhaktiverse.com ▶️ https://www.youtube.com/@MyBhaktiVerse
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