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युग बदला, गीता नहीं

टोक्यो में नींद की रेस | विश्राम भी साधना है — गीता की 3 सीखें | युग बदला, गीता नहीं Ep 15

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इसी महीने जापान की राजधानी टोक्यो में एक अनोखी प्रतियोगिता हुई — 'मैट रेस'। गद्दे बनाने वाली कंपनी कोआला स्लीप जापान ने दर्जनों लोगों को बुलाया, सबको नींद मापने वाले यंत्र पहनाए, और एक धीमी रोशनी वाले कमरे में गद्दों पर नब्बे मिनट तक सुलाया। विजेता वह चुना गया, जो सबसे तेज़ और सबसे गहरी नींद सोया। रिपोर्टों के अनुसार प्रथम पुरस्कार बीस लाख येन से ज़्यादा — लगभग चौदह हज़ार डॉलर। विजेता ने सिर्फ़ उपनाम 'सुइमी' बताया; उन्होंने कहा, यह रक़म मकान बदलने के खर्च में काम आएगी। प्रतिभागी चिसातो होंडा (32) ने कहा — 'सब कुछ पल भर में बीत गया; काश थोड़ी देर और सो पाते।' संदर्भ: जापान को नींद से वंचित राष्ट्र कहा जाता है। ओईसीडी के 2021 के आँकड़ों के अनुसार जापानी लोग रोज़ाना औसतन सात घंटे चौबीस मिनट सोते थे — सभी ओईसीडी देशों में सबसे कम। (ये बताए गए तथ्य हैं।) जिस दुनिया में लगातार भागदौड़ को ही सफलता माना जाता है, वहाँ सबसे तेज़ और गहरी नींद की प्रतियोगिता क्या कहती है? इस एपिसोड में SarthiAI गीता के तीन सूत्र खोलता है: 1. गीता 2.69 — या निशा सर्वभूतानां (सच्ची जागृति विश्राम से आती है; जो सोता नहीं, वह जागता भी नहीं) 2. गीता 3.30 — विगतज्वरः (चिंता का ज्वर उतारिए; थकान काम से नहीं, ज्वर से आती है) 3. गीता 2.70 — समुद्रमापः (मन को समुद्र जैसा स्थिर कीजिए; शांत मन गहरी नींद सोता है) परिस्थितियाँ बदलती हैं — गीता नहीं 🙏 🌐 https://bhaktiverse.com 🔔 YouTube: https://www.youtube.com/@MyBhaktiVerse 📸 Instagram: @bhaktiverse.bharat 👍 Facebook: https://www.facebook.com/anitesh.shaw 💬 WhatsApp: https://chat.whatsapp.com/HK8CX1Y4eKgEiLlLhnuhER

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