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आज शनिवार, 10 अक्टूबर — सर्व पितृ अमावस्या (महालया अमावस्या), पितृ पक्ष का अंतिम दिन। यह दिन उन सभी पितरों के लिए एक साथ है जिनकी देहावसान-तिथि अज्ञात है या जिनका श्राद्ध इस पक्ष में छूट गया। संदेश एक ही है — कोई नहीं भूला। गीता (9.22) में श्रीकृष्ण कहते हैं — "अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥" — जो अनन्य भाव से स्मरण करता है, उसका योगक्षेम मैं स्वयं वहन करता हूँ। आज स्मरण ही अर्पण है। आज क्या करें: स्नान के बाद दोपहर के कुटुप-रोहिणा / अपराह्न काल में काले तिल के जल से तर्पण करें, सब पितरों के नाम एक घी का दीया जलाएं, और यथाशक्ति अन्नदान करें। (समय: अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर रात 9:35 से 10 अक्टूबर रात 9:19 तक, IST — अपने स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि करें।) कल, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि आरंभ — माँ का स्वागत। 🙏 रोज़ ऐसी ही भक्ति भरी कहानियाँ पाने के लिए जुड़िए: 🌐 https://bhaktiverse.com ▶️ https://www.youtube.com/@MyBhaktiVerse
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