दशमी श्राद्ध 2026 | पितृदेवो भव — पितर ही देवता | तैत्तिरीय उपनिषद
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आज सोमवार, 5 अक्टूबर — दशमी श्राद्ध! पितृ पक्ष का दसवां दिन। परंपरा के अनुसार, आश्विन कृष्ण दशमी को दशमी श्राद्ध किया जाता है — उन सभी पितरों के नाम, जो दशमी तिथि को इस दुनिया से गए। तर्पण, पिंडदान, अन्नदान — ये सब कृतज्ञता के भाव हैं। पर श्राद्ध सिर्फ़ कर्मकांड नहीं — श्राद्ध है श्रद्धा। तैत्तिरीय उपनिषद (शिक्षावल्ली 1.11) में आचार्य अपने शिष्य से कहते हैं — "मातृदेवो भव, पितृदेवो भव" — मां को देवता मानो, पिता को देवता मानो। ये समावर्तन संस्कार का उपदेश है — जीवन भर के लिए। पितरों की सबसे बड़ी विरासत धन नहीं, संस्कार हैं — ईमानदारी, मेहनत, बड़ों का आदर। जैसे एक दीये से दूसरा दीया जलता है — बुझे बिना — वैसे ही उनके संस्कार हममें जीते हैं। आज का छोटा संकल्प: पितरों के नाम एक अच्छा काम कीजिए, और अपने बच्चों को उनकी एक कहानी सुनाइए। 🙏 🙏 रोज़ ऐसी ही भक्ति भरी कहानियाँ पाने के लिए जुड़िए: 🌐 https://bhaktiverse.com ▶️ https://www.youtube.com/@MyBhaktiVerse
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