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युग बदला, गीता नहीं

परीक्षा में ईमानदारी कैसे लौटे | निलेकणि का प्रस्ताव और गीता की 3 सीखें | युग बदला, गीता नहीं

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13 अक्टूबर 2026 — दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के मंच से इन्फ़ोसिस के सह-संस्थापक नंदन निलेकणि ने परीक्षा सुधार का बड़ा प्रस्ताव रखा: प्रश्न-पत्र आख़िरी क्षण में एक विशाल सुरक्षित प्रश्न-बैंक से तैयार हों — जब कोई तय प्रश्न-पत्र ही नहीं होगा, तो चोरी या बिक्री की गुंजाइश नहीं रहेगी; साथ ही कंप्यूटर आधारित परीक्षा (आज ~डेढ़ लाख केंद्र) का विस्तार हो। निलेकणि उस सरकारी टास्क फ़ोर्स के अध्यक्ष हैं, जो नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद बनाई गई थी; रिपोर्ट इसी महीने अपेक्षित है। (यह प्रस्ताव है — लागू नीति नहीं।) पेपर लीक शॉर्टकट का प्रलोभन बढ़ाता है; मेहनत का हक़ मारता है। गीता की 3 सीखें: 1. गीता 2.47 — कर्मण्येवाधिकारस्ते (कर्म पर अधिकार, फल पर नहीं) 2. गीता 6.35 — अभ्यासेन (निरंतर अभ्यास ही जीत है) 3. गीता 4.38 — न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रम् (ज्ञान जैसा पवित्र कुछ नहीं) युग बदला — गीता नहीं 🙏 🌐 https://bhaktiverse.com 🔔 YouTube: https://www.youtube.com/@MyBhaktiVerse 📸 Instagram: @bhaktiverse.bharat 👍 Facebook: https://www.facebook.com/anitesh.shaw 💬 WhatsApp: https://chat.whatsapp.com/HK8CX1Y4eKgEiLlLhnuhER

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