इंदिरा एकादशी 2026 | पितरों के लिए व्रत | गीता 9.34
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आज मंगलवार, 6 अक्टूबर — इंदिरा एकादशी! पितृ पक्ष के भीतर की एकादशी। साल भर की चौबीस एकादशियों में इंदिरा एकादशी इकलौती ऐसी है, जिसका पुण्य अपने लिए नहीं रखा जाता — पितरों को अर्पित किया जाता है। कथा के अनुसार, महिष्मती नगरी के राजा इंद्रसेन के पिता यमलोक की पीड़ा में थे। नारद मुनि ने कहा — आश्विन कृष्ण एकादशी का व्रत करो, और उसका सारा फल पितरों को अर्पित करो। राजा ने परिवार और प्रजा समेत व्रत किया — और उनके पिता को मुक्ति मिली। गीता (9.34) में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं — "मन्मना भव मद्भक्तो" — मुझमें मन लगाओ, मेरे भक्त बनो। यही व्रत का सार है। आज क्या करें: उपवास रखें, भगवान विष्णु या शालिग्राम की पूजा करें, तुलसी के पत्ते और पीले फूल चढ़ाएं, काले तिल से तर्पण करें, अन्नदान करें। पारण बुधवार, 7 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद। आज एकादशी श्राद्ध भी है — पितृ पक्ष का ग्यारहवां दिन। जो पुण्य आज मिले, उसे पितरों को अर्पित कर दीजिए। 🙏 🙏 रोज़ ऐसी ही भक्ति भरी कहानियाँ पाने के लिए जुड़िए: 🌐 https://bhaktiverse.com ▶️ https://www.youtube.com/@MyBhaktiVerse
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